वेबसाइट माइग्रेशन के बाद SEO नुकसान से बचना यानी पुरानी URL संरचना से मिली अथॉरिटी, ऑर्गैनिक ट्रैफिक और इंडेक्स विज़िबिलिटी को नई वेबसाइट या नए ढांचे में सही तरीके से ट्रांसफर करना। इसके लिए माइग्रेशन से पहले प्लानिंग, 301 रीडायरेक्ट, टेक्निकल SEO चेक, स्पीड ऑप्टिमाइज़ेशन और माइग्रेशन के बाद लगातार मॉनिटरिंग जैसे कदम बिना चूक पूरे करने होते हैं। सफल site migration का लक्ष्य यह होता है कि Google नई साइट को जल्दी समझे, यूज़र टूटे हुए पेजों पर न पहुंचे और रैंकिंग सिग्नल कम से कम नुकसान के साथ सुरक्षित रहें।
Site migration कई तरह की स्थितियों में हो सकता है: डोमेन बदलना, HTTP से HTTPS पर जाना, CMS या वेबसाइट प्लेटफॉर्म बदलना, URL स्ट्रक्चर नया करना, hosting migration, डिजाइन रीडिज़ाइन करना या मल्टीलैंग्वेज वेबसाइट बनाना। अगर ये काम सही तरीके से न किए जाएं तो ऑर्गैनिक ट्रैफिक कुछ ही दिनों में 20-60 प्रतिशत तक गिर सकता है; और अगर गंभीर तकनीकी गलतियां हों तो नुकसान कई महीनों तक जारी रह सकता है। लेकिन एक अच्छी migration checklist, सही सर्वर कॉन्फ़िगरेशन और नियमित डेटा ट्रैकिंग के साथ इस जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
इस गाइड में Hostragons ब्लॉग के पाठकों के लिए 2026 की SEO अपेक्षाओं के अनुरूप एक व्यावहारिक website migration roadmap दिया गया है। यहां बताए गए कदम छोटे बिज़नेस वेबसाइटों से लेकर बड़े ई-कॉमर्स प्रोजेक्ट्स तक, WordPress साइटों से लेकर कस्टम सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर तक, कई तरह के परिदृश्यों में अपनाए जा सकते हैं।
वेबसाइट माइग्रेशन क्या है और SEO के लिए यह जोखिम भरा क्यों होता है?
वेबसाइट माइग्रेशन का मतलब है किसी वेबसाइट में तकनीकी, स्ट्रक्चरल या एड्रेस यानी URL स्तर पर बड़ा बदलाव करना। ऐसा बदलाव सर्च इंजनों को साइट को दोबारा crawl करने और कई SEO सिग्नल्स को फिर से समझने के लिए मजबूर करता है। Google किसी पेज को सिर्फ उसके कंटेंट से नहीं आंकता; URL, कंटेंट, internal linking, canonical, hreflang, page speed, structured data और server responses — इन सबको मिलाकर वेबसाइट की गुणवत्ता और प्रासंगिकता समझी जाती है। इनमें से कोई भी हिस्सा गलत तरीके से माइग्रेट हो जाए तो रैंकिंग गिर सकती है।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट को हर महीने 50,000 ऑर्गैनिक विज़िट मिलती हैं। अगर उसकी category URLs बदल दी जाती हैं, लेकिन पुरानी URLs को नई URLs पर 301 redirect नहीं किया जाता, तो Google पुरानी category pages को 404 के रूप में देख सकता है। यूज़र भी सर्च रिज़ल्ट से क्लिक करके खाली या टूटे हुए पेज पर पहुंचेंगे। ऐसी स्थिति में सिर्फ ट्रैफिक नहीं, conversion और brand trust भी प्रभावित होते हैं। इसी तरह HTTPS migration में mixed content, गलत canonical या SSL certificate errors हों तो सुरक्षा और crawling दोनों में दिक्कत आती है। इसलिए migration सिर्फ डेवलपमेंट टीम का काम नहीं है; इसे SEO, content, analytics और hosting टीमों को साथ मिलकर संभालना चाहिए। SSL migration के लिए SSL प्रमाणपत्र समाधान और सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग के लिए वेब होस्टिंग सेवाएं पेज इस प्रक्रिया में मददगार हो सकते हैं।
सबसे आम Site Migration प्रकार
हर migration का SEO जोखिम एक जैसा नहीं होता। सिर्फ hosting provider बदलना अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला हो सकता है, जबकि domain और URL structure दोनों को एक साथ बदलना काफी उच्च जोखिम वाला होता है। नीचे दी गई तालिका अलग-अलग migration scenarios को सरल रूप में समझाती है।
| माइग्रेशन प्रकार | SEO जोखिम | महत्वपूर्ण चेक | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| HTTP से HTTPS पर जाना | मध्यम | SSL, 301, canonical, mixed content | http://site.com की जगह https://site.com |
| डोमेन बदलना | उच्च | URL mapping, Search Console address change, backlink tracking | oldbrand.com की जगह newbrand.com |
| CMS या प्लेटफॉर्म बदलना | उच्च | Meta data, heading structure, content, schema, URL structure | कस्टम सॉफ्टवेयर से WordPress पर जाना |
| Hosting migration | कम-मध्यम | DNS, uptime, speed, server response codes | Shared hosting से VPS पर जाना |
| URL structure बदलना | उच्च | 301 map, internal links, sitemap | /product?id=12 की जगह /product/smart-watch |
| Design redesign | मध्यम | Content visibility, mobile compatibility, Core Web Vitals | नया theme या frontend migration |
जोखिम जितना अधिक हो, तैयारी का समय भी उतना ही लंबा होना चाहिए। किसी बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए migration plan 4-8 सप्ताह पहले तैयार करना बेहतर है, जबकि छोटी corporate website के लिए भी कम से कम 1-2 सप्ताह की technical audit और testing जरूरी है।
माइग्रेशन से पहले SEO चेकलिस्ट
SEO नुकसान से बचने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा migration से पहले की तैयारी है। वेबसाइट live होने के बाद भी गलतियां सुधारी जा सकती हैं, लेकिन अगर Google गलत signals crawl कर लेता है, तो recovery में अधिक समय लग सकता है। इसलिए migration से पहले नीचे दिए गए कदम जरूर पूरे करें।
1. मौजूदा परफॉर्मेंस को रिकॉर्ड करें
सबसे पहले आपको यह साफ पता होना चाहिए कि आपकी साइट अभी किस स्थिति में है। Google Search Console से पिछले 16 महीनों के clicks, impressions, average position और CTR data को export करें। Google Analytics 4 में organic sessions, conversions, revenue data और सबसे ज्यादा traffic लाने वाली landing pages की सूची बनाएं। अगर आपके पास rank tracking tool है, तो कम से कम शीर्ष 100-500 keywords की current positions भी सेव करें।
एक व्यावहारिक तरीका यह है कि आप पेजों को तीन समूहों में बांटें: ज्यादा traffic लाने वाले पेज, backlinks पाने वाले पेज और conversions generate करने वाले पेज। Migration के दौरान इन पेजों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर कुल organic traffic का 70 प्रतिशत सिर्फ 40 URLs से आता है, तो उन URLs के redirects, canonical और content checks manual तरीके से करने चाहिए।
2. सभी URLs crawl करें और inventory बनाएं
Migration से पहले अपनी वेबसाइट की पूरी URL inventory बनाए बिना आगे न बढ़ें। Screaming Frog, Sitebulb, Ahrefs, Semrush या इसी तरह के tools से सभी crawlable URLs की सूची तैयार करें। सिर्फ active pages ही नहीं, बल्कि 3xx, 4xx, 5xx status वाली URLs, canonicalized pages, noindex pages और sitemap में मौजूद URLs को भी अलग-अलग रिकॉर्ड करें।
URL inventory में ये columns जरूर होने चाहिए: old URL, new URL, status code, page title, meta description, H1, canonical, index status, organic traffic, backlink count और priority level। यही table आपके 301 redirect map की नींव बनेगी। खासकर जिन वेबसाइटों में हजारों products, categories या blog posts हैं, उनमें यह काम किए बिना migration शुरू करना SEO नुकसान को न्योता देने जैसा है।
3. URL mapping और 301 redirect map तैयार करें
हर मूल्यवान पुरानी URL को सबसे प्रासंगिक नई URL पर redirect करना चाहिए। सभी पुराने URLs को homepage पर भेज देना आसान लग सकता है, लेकिन SEO के लिहाज से यह कमजोर समाधान है। Google पुरानी page topic और नई target page topic के बीच relevance देखता है। अगर “महिला रनिंग शूज़” वाली पुरानी category को नई साइट पर सामान्य “शूज़” पेज पर भेज दिया जाए, तो ranking signals कमजोर हो सकते हैं।
सही redirect model यह है: अगर equivalent page मौजूद है तो one-to-one redirect करें; अगर exact equivalent नहीं है तो सबसे नजदीकी category या relevant page पर redirect करें; और जो pages पूरी तरह बेकार हैं या जानबूझकर हटाए गए हैं, उनके लिए 410 status इस्तेमाल करने पर विचार करें। Temporary move में 302 redirect काम आ सकता है, लेकिन permanent website migration में सामान्य और सही विकल्प 301 redirect होता है।
4. Staging environment को search engines से बंद रखें
अगर नई साइट test या staging environment पर तैयार हो रही है, तो यह सुनिश्चित करें कि staging area index न हो। इसके लिए HTTP authentication, IP restriction या noindex tag का उपयोग किया जा सकता है। लेकिन live होते समय noindex tag गलती से production site पर नहीं रहना चाहिए। Migration projects में यह एक बहुत आम गलती है कि test environment में लगा noindex meta tag live site पर भी चला जाता है। ऐसी गलती कुछ ही दिनों में index loss का कारण बन सकती है।
डोमेन और DNS की सुरक्षित तैयारी के लिए डोमेन जांच और डोमेन प्रबंधन resources और server-side uninterrupted migration के लिए वीपीएस सर्वर समाधान पर विचार किया जा सकता है।
Technical SEO Settings: Live होने से पहले क्या-क्या चेक करें
Technical SEO migration process की रीढ़ है। Content अच्छा होने के बावजूद गलत server responses, broken canonical tags या धीमे pages rankings को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 2026 तक Google user experience और technical accessibility signals को और ज्यादा holistic तरीके से देखता है। इसलिए यह पर्याप्त नहीं कि bots page access कर लें; जरूरी है कि असली users भी site को तेज, सुरक्षित और बिना अड़चन experience करें।
Canonical tags को सही तरीके से सेट करें
नई वेबसाइट के canonical tags हमेशा नई URLs की ओर point करने चाहिए। अगर canonical tags पुराने domain या staging URL को दिखा रहे हैं, तो वे Google को गलत signal भेजेंगे। प्रत्येक page या तो self-canonical होना चाहिए या सोच-समझकर किसी equivalent main page को canonical करना चाहिए। E-commerce websites में filtered URLs, sorting parameters और variation pages को अलग से जांचना जरूरी है।
XML Sitemap और Robots.txt को update करें
Live migration के समय sitemap में केवल वही नई URLs होनी चाहिए जिन्हें आप index कराना चाहते हैं और जिनका status code 200 है। 301, 404, noindex या किसी अन्य page को canonical करने वाली URLs sitemap में नहीं रहनी चाहिए। Robots.txt file में CSS, JS और image files की crawling को रोकने वाले बेवजह Disallow rules नहीं होने चाहिए। साथ ही sitemap URL को robots.txt में स्पष्ट रूप से mention करना अच्छा practice है।
Structured data को सुरक्षित रखें
Product, article, FAQ, organization, breadcrumb और review schema जैसे structured data migration के दौरान गायब हो सकते हैं। इससे rich results visibility कम हो सकती है। नई theme या नए platform पर schema markup को फिर से test करना चाहिए। Google Rich Results Test और Schema Markup Validator से critical pages की जांच करें। खासकर e-commerce websites में price, stock और review fields का updated और accurate होना बेहद जरूरी है।
Internal links को नई URLs पर update करें
भले ही पुरानी URLs 301 redirect के जरिए काम कर रही हों, site के अंदर की links सीधे नई URLs पर ही होनी चाहिए। Internal links का 301 redirect chain से होकर गुजरना crawl budget को बेवजह खर्च करता है और redirect chain का जोखिम बढ़ाता है। Menu, footer, breadcrumb, blog internal links और product recommendation sections को manual review या automated crawl से verify करना चाहिए।
Hosting, Server और Speed Factors
Website migration सिर्फ URL बदलने का नाम नहीं है; कई बार यह पूरी infrastructure performance को भी बदल देता है। अगर नया hosting environment धीमा, unstable या गलत configured है, तो SEO performance पर खराब असर पड़ सकता है। Googlebot pages को तेजी से crawl कर सके और users कम latency के साथ website access कर सकें, इसके लिए server-side setup मजबूत होना चाहिए।
Migration से पहले TTFB, LCP, INP और CLS metrics मापें। 2026 standards में खासकर mobile performance बहुत महत्वपूर्ण हो चुकी है। अच्छी तरह optimized page में LCP को 2.5 seconds से कम, INP को 200 ms से कम और CLS को 0.1 से कम रखने का लक्ष्य होना चाहिए। ये metrics सिर्फ theme optimization से नहीं सुधरते; इनके लिए सही hosting, caching, CDN, image compression और database optimization की भी जरूरत होती है।
अगर hosting migration किया जा रहा है, तो DNS TTL value को migration से 24-48 घंटे पहले कम किया जा सकता है। उदाहरण के लिए TTL को 300 seconds पर लाने से cutover के समय DNS propagation तेज हो सकता है। Server side पर PHP version, database compatibility, SSL installation, HTTP/2 या HTTP/3 support, gzip/brotli compression और cache layer जरूर चेक करें। Performance-focused शुरुआत के लिए तेज वेब होस्टिंग पैकेज और WordPress projects के लिए वर्डप्रेस होस्टिंग समाधान देखे जा सकते हैं।
Migration Day: Live Launch Plan
Migration day को जल्दबाजी में नहीं संभालना चाहिए। Live launch उस समय किया जाना चाहिए जब traffic सबसे कम हो और सभी संबंधित teams reachable हों। बड़ी websites में weekend night migration आकर्षक लग सकता है, लेकिन अगर technical team और decision makers available नहीं हैं तो जोखिम बढ़ जाता है। सबसे अच्छा समय वही है जब traffic कम हो, पर emergency intervention आसान हो।
Live करते समय अपनाए जाने वाले कदम
- Database और files का backup लें।
- DNS routing या server migration को तय समय पर शुरू करें।
- SSL certificate सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं, यह verify करें।
- Old URLs से new URLs तक 301 redirects test करें।
- Homepage, category, product, blog, contact और payment जैसे critical templates check करें।
- Robots.txt, sitemap और canonical tags verify करें।
- Analytics, Tag Manager, conversion और advertising tags के काम करने की पुष्टि करें।
- Search Console में नया sitemap submit करें।
- पहले घंटे से ही server logs और error records monitor करें।
पहले कुछ घंटों में 404, 500, redirect loop, mixed content और noindex errors ढूंढना बेहद जरूरी है। इन problems को जल्दी पकड़ लेने से SEO नुकसान काफी कम किया जा सकता है।
Migration के बाद पहले 30 दिन: Monitoring और Optimization

Migration पूरा होते ही काम खत्म नहीं होता; असली critical period पहले 30 दिन होते हैं। Google नई structure को crawl और evaluate करता है, इसलिए rankings में कुछ fluctuations दिखाई दे सकते हैं। हल्के position changes सामान्य हैं; लेकिन indexed pages की संख्या में तेज गिरावट, 404 errors में बढ़ोतरी या organic traffic में लगातार कमी दिखे तो तुरंत action लेना चाहिए।
पहले 7 दिनों के checks
पहले सप्ताह हर दिन Search Console coverage reports, crawl stats, sitemap status और manual actions चेक करें। सबसे ज्यादा traffic लाने वाली old URLs को एक-एक करके test करें और verify करें कि वे सही new pages पर जा रही हैं। Server log analysis में देखें कि Googlebot किन pages को crawl कर रहा है और उसे 404 या 5xx errors मिल रहे हैं या नहीं।
इस अवधि में organic traffic 5-15 प्रतिशत तक fluctuate कर सकता है। लेकिन branded searches में अचानक बड़ी गिरावट, homepage का index से बाहर हो जाना या सभी category pages की visibility खोना critical alarm है। ऐसी स्थिति में robots.txt, noindex, canonical और redirect rules को सबसे पहले check करना चाहिए।
पहले 30 दिनों में मापे जाने वाले KPI
- Organic sessions और users की संख्या
- महत्वपूर्ण keywords पर ranking changes
- Indexed pages की संख्या
- 404, 500 और redirect chains की संख्या
- Googlebot crawl frequency
- Core Web Vitals field data
- Conversion rate और revenue impact
- Backlink पाने वाली old URLs का redirect status
उदाहरण के लिए, migration से पहले रोज़ 2,000 organic sessions पाने वाली site migration के पहले सप्ताह में 1,750-1,900 range तक गिर सकती है। लेकिन अगर दूसरे और तीसरे सप्ताह में recovery शुरू नहीं होती, तो समस्या की जांच करनी चाहिए। सही तरीके से managed migration में ज्यादातर websites 2-6 सप्ताह में stable हो जाती हैं; बड़े domain change या URL restructuring में यह समय 8-12 सप्ताह तक जा सकता है।
Backlink और Authority Loss से बचना
Backlinks migration के दौरान बचाए जाने वाले सबसे कीमती SEO assets में से हैं। Old URLs को मिलने वाली quality links को 301 redirects के जरिए new pages पर transfer करना चाहिए। लेकिन जहां संभव हो, सबसे महत्वपूर्ण backlink sources से संपर्क करके links को सीधे new URLs पर update करवाना और भी बेहतर होता है।
Backlink analysis के लिए सबसे ज्यादा links पाने वाली 100-500 URLs की सूची बनाएं। उन सभी के redirects को सही target pages तक test करें। अगर कोई पुराना blog post नई site पर एक बड़े combined guide में merge हो गया है, तो redirect topic-relevant होना चाहिए। सबको homepage पर भेजना link value का एक हिस्सा बेकार कर सकता है। अगर old domain इस्तेमाल में बना रहेगा, तो उसका renewal period track करें और domain expire न होने दें। Brand migration के मामलों में old domain को कम से कम 2-3 साल तक अपने पास रखना अच्छा practice है।
Content और User Experience के कारण होने वाले SEO नुकसान
कई migration projects में technical redirects सही होते हैं, लेकिन content छोटा कर दिया जाता है या page layout बदल जाता है, जिससे rankings गिर जाती हैं। Google ने पुराने page पर मौजूद text, headings, tables, image alt text, FAQs, comments और product information को ranking signals के रूप में इस्तेमाल किया हो सकता है। अगर नई design में ये elements हटा दिए जाते हैं, तो URL वही रहने पर भी performance गिर सकती है।
इसलिए high-traffic pages पर content changes बहुत सावधानी से करें। H1 और मुख्य heading structure को यथासंभव सुरक्षित रखें, महत्वपूर्ण subheadings migrate करें, images में alt text जोड़ें और page का search intent न बदलें। अगर migration के साथ content optimization भी करना है, तो सभी pages को एक साथ बदलने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना अधिक सुरक्षित है।
User experience की तरफ mobile menu, filtering, search box, form fields और purchase steps को test करें। SEO traffic बच भी जाए, लेकिन conversion funnel टूट जाए तो business goals को नुकसान होगा। इसलिए migration की सफलता सिर्फ rankings से नहीं, conversions और revenue metrics से भी मापी जानी चाहिए।
सबसे आम Site Migration गलतियां
- 301 की जगह 302 इस्तेमाल करना: Permanent migration में 301 redirect को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- सभी old URLs को homepage पर redirect करना: Topic relevance कमजोर होती है और authority transfer घटता है।
- Live site पर noindex tag भूल जाना: इससे index loss हो सकता है।
- Sitemap update न करना: Google old या incorrect URLs crawl करता रह सकता है।
- Internal links को old URLs पर छोड़ देना: Crawl budget और user experience दोनों प्रभावित होते हैं।
- Backlink पाने वाले pages को नजरअंदाज करना: Authority loss हो सकता है।
- Speed tests को हल्के में लेना: नई site दिखने में अच्छी हो, लेकिन slow हो तो performance गिर सकती है।
- Analytics codes migrate न करना: नुकसान हुआ है या नहीं, इसे मापा ही नहीं जा सकेगा।
इनमें से ज्यादातर गलतियां migration से पहले बनी checklist और staging environment crawl से रोकी जा सकती हैं। खासकर hosting, SSL और DNS से जुड़ी छोटी लगने वाली देरी भी Googlebot के crawling behavior को प्रभावित कर सकती है।
प्रैक्टिकल Site Migration SEO Checklist
नीचे दी गई छोटी checklist आपके migration project में practical summary के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है:
- Current organic traffic, rankings और conversion data export करें।
- सभी URLs crawl करें और prioritized URL inventory बनाएं।
- Old-new URL mapping page level पर तैयार करें।
- 301 redirects को staging environment में test करें।
- Canonical, hreflang, schema, meta title और H1 fields compare करें।
- Robots.txt और XML sitemap files को live website के अनुरूप बनाएं।
- SSL, DNS, cache, CDN और server performance test करें।
- Live होने के बाद पहले 24 घंटों में critical templates manually test करें।
- Search Console में sitemap submit करें और coverage errors monitor करें।
- पहले 30 दिनों तक 404, 5xx, rankings और traffic metrics track करें।
यह checklist दिखने में सरल है, लेकिन अनुशासन के साथ लागू करने पर website migration के बाद SEO नुकसान से बचने के लिए सबसे मजबूत सुरक्षा परत बनाती है।
निष्कर्ष: प्लान्ड माइग्रेशन, कंट्रोल्ड SEO परफॉर्मेंस
Website migration सही तरीके से किया जाए तो growth opportunity बन सकता है; तेज hosting, clean URL structure, बेहतर user experience और secure SSL infrastructure लंबे समय में SEO performance बढ़ा सकते हैं। लेकिन बिना planning के किया गया migration traffic, index visibility और revenue loss का कारण बन सकता है। सफल migration का मूल formula स्पष्ट है: पहले measure करें, फिर map करें, technical testing करें, controlled launch करें और पहले 30 दिनों को ध्यान से monitor करें।
Hostragons infrastructure में domain, SSL, hosting और server needs plan करते समय SEO impact को भी ध्यान में रखना migration process को अधिक सुरक्षित बनाता है। अगर आप किसी नए project पर जाना चाहते हैं या अपनी existing website को मजबूत infrastructure पर move करने की सोच रहे हैं, तो अपनी जरूरतों के हिसाब से solutions देखकर जोखिम-रहित शुरुआत कर सकते हैं: Hostragons होस्टिंग समाधान.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वेबसाइट माइग्रेशन के बाद SEO loss सामान्य है?
थोड़े समय के ranking fluctuations सामान्य हैं। अगर redirects, sitemap, canonical और technical checks सही तरीके से किए गए हैं, तो ज्यादातर websites 2-6 सप्ताह में stable हो जाती हैं। लेकिन तेज index loss, बहुत अधिक 404 errors या noindex problem दिखे तो तुरंत intervention जरूरी है।
Site migration के दौरान 301 redirect क्यों महत्वपूर्ण है?
301 redirect search engines को बताता है कि old URL स्थायी रूप से new URL पर move हो गई है। इससे users सही page तक पहुंचते हैं और old page के authority signals यथासंभव new page को transfer होते हैं।
क्या hosting change SEO rankings को प्रभावित करता है?
हां, कर सकता है। अगर नई hosting तेज और stable है तो यह positive impact दे सकती है; लेकिन frequent downtime, high TTFB, SSL error या गलत DNS configuration हो तो rankings और crawling performance पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
Migration के बाद old domain कितने समय तक रखना चाहिए?
Domain change के मामलों में old domain को कम से कम 2-3 साल तक अपने पास रखने की सलाह दी जाती है। इससे old URLs पर आने वाले users और backlink signals 301 redirects के जरिए new domain तक transfer होते रहते हैं।
Site migration के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?
सबसे अच्छा समय वह है जब traffic कम हो, लेकिन technical team active support दे सके। बड़ी websites में migration से पहले testing, backup और rollback plan तैयार किए बिना live launch नहीं करना चाहिए।